मेरी आँखों का पानी सूखने की आ गयी नौबत
कोई आके मना लेता, मैं कब से रूठा रूठा हूँ |
मेरी दुनिया में भी कुछ रंग सजा देता
कोई आके मना लेता, मैं कब से रूठा रूठा हूँ |
मेरी जिद का भी कोई मान रख ले, प्यार से तक ले
कोई थपकी लगा देता, मैं कब से रूठा रूठा हूँ |
मेरी हद है बहुत कम और तुम्हें हद्तर इज़ाज़त है
गले से ही लगा लेता, मैं कब से रूठा रूठा हूँ |
दोस्ती ही निभा लेता, मैं कब से रूठा रूठा हूँ |