उठा करते थे मेरे लिए जो हाथ, कभी दुआ मांगने
वो अब सलाम के जवाब में
सलाम कुबूल करने भी जो न उट्ठे तो
हम शिकवों के पुलिंदे नहीं बटोरा करते;
दिल तो बंजारा हो चुका है और बंजारे
आज को जीते हैं, कल पे गुजारा नहीं किया करते |
चलती राहों में, कारवां तो बन ही जाते हैं
दो-चार कदम कोई हमकदम बन
चलने से मना भी कर दे, तो भी
उम्मीद का दामन छोड़ा नहीं करते;
दिल तो बंजारा हो चुका है और बंजारे
अपनी उम्मीद को कभी बेसहारा नहीं किया करते |
नीवं उखड़ने का डर, ईंट बिखरने का डर
देहली उतरने का डर, दर्द से गुजरने का डर
घर नहीं बसता या के
हम इस दर्द से रिश्ता नहीं जोड़ा करते;
दिल तो बंजारा हो चुका है और बंजारे
कभी अपनी हालात को आवारा नहीं किया करते |
वो अब सलाम के जवाब में
सलाम कुबूल करने भी जो न उट्ठे तो
हम शिकवों के पुलिंदे नहीं बटोरा करते;
दिल तो बंजारा हो चुका है और बंजारे
आज को जीते हैं, कल पे गुजारा नहीं किया करते |
चलती राहों में, कारवां तो बन ही जाते हैं
दो-चार कदम कोई हमकदम बन
चलने से मना भी कर दे, तो भी
उम्मीद का दामन छोड़ा नहीं करते;
दिल तो बंजारा हो चुका है और बंजारे
अपनी उम्मीद को कभी बेसहारा नहीं किया करते |
नीवं उखड़ने का डर, ईंट बिखरने का डर
देहली उतरने का डर, दर्द से गुजरने का डर
घर नहीं बसता या के
हम इस दर्द से रिश्ता नहीं जोड़ा करते;
दिल तो बंजारा हो चुका है और बंजारे
कभी अपनी हालात को आवारा नहीं किया करते |
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