हवा कुछ बदली बदली सी महसूस होती है
पहले दर्द देती थी, अब उसके होने का बहाना दे जाती है,
जब भी कहीं से मुझे छूकर निकलती है
किसी के होने का एहसास दिला जाती है,
शरीर शिथिल हो, बंद हो चुकी हों पलकें तो क्या
सामने किसी का अक्स दिखा जाती है,
कोई आता नहीं, और कोई आनेवाला नहीं
फिर भी किसी का इंतज़ार दे जाती है,
हवा कुछ बदली बदली सी महसूस होती है
पहले दर्द देती थी, अब उसके होने का बहाना दे जाती है |
पहले दर्द देती थी, अब उसके होने का बहाना दे जाती है,
जब भी कहीं से मुझे छूकर निकलती है
किसी के होने का एहसास दिला जाती है,
शरीर शिथिल हो, बंद हो चुकी हों पलकें तो क्या
सामने किसी का अक्स दिखा जाती है,
कोई आता नहीं, और कोई आनेवाला नहीं
फिर भी किसी का इंतज़ार दे जाती है,
हवा कुछ बदली बदली सी महसूस होती है
पहले दर्द देती थी, अब उसके होने का बहाना दे जाती है |
No comments:
Post a Comment