Saturday, April 7, 2012

बात अभी बाकी है...

रात अभी बाकी है
चाँद अभी बाकी है,
मेरे हाथों में तेरी छुवन का
एहसास अभी बाकी है;

औंधे हैं पड़े हुए
करवट कभी बदल रहे,
जगह आँखों में नींद की
तेरी याद अभी बाकी है;

नज़र भर के देखा था तुम्हें
सामने बैठे थे जब,
इन नज़रों में तेरे जाने के बाद
परछाईं तेरी बाकी है;

सोचता हूँ मिलूँ कल जो तुम्हें
बताऊँ हाल-ए-दिल तुम्हें,
आँखों में देख कह दूँ तुम्हें
जो बात अभी बाकी है |

हवा कुछ बदली बदली सी महसूस होती है

हवा कुछ बदली बदली सी महसूस होती है
पहले दर्द देती थी, अब उसके होने का बहाना दे जाती है,
जब भी कहीं से मुझे छूकर निकलती है
किसी के होने का एहसास दिला जाती है,
शरीर शिथिल हो, बंद हो चुकी हों पलकें तो क्या
सामने किसी का अक्स दिखा जाती है,
कोई आता नहीं, और कोई आनेवाला नहीं
फिर भी किसी का इंतज़ार दे जाती है,
हवा कुछ बदली बदली सी महसूस होती है
पहले दर्द देती थी, अब उसके होने का बहाना दे जाती है |

अधूरा तो फकत एक बहाना है...

अधूरा तो फकत एक बहाना है उसे पास बुलाने का
वो पास आये और बैठे मेरे पास तो बहाना मिले
मेरी साँसों को उसकी साँसों से बातें करने का
मेरे कंधों को उसके कन्धों से गले लगने का
मेरे चेहरे को उसकी जुल्फों के छुवन का एहसास का
मेरे दिल को उसके दिल की धड़कन के साथ गाने का
मेरी आँखों को उसकी आँखों में खुद को भुला देने का
अधूरा तो फकत एक बहाना है उसे पास बुलाने का...

लिक्खूं कुछ अधूरा सा...

लिक्खूं कुछ
अधूरा सा ताकि
तुम देखो जब
पूछो मुझसे
और मैं इस बहाने
अपनी कविता
तुम्हें
पूरी करने को कह दूँ ...
कई दिनों से सोच रहा हूँ
साथ बैठूं तो
तुम्हारे कांधों पे बांह डाल दूं
और कह दूं ...
जो मैं सोचता रहा हूँ
बीते कई दिनों से...

ऐसा कभी तो होता होगा...

भोर की पहली किरण
ओस के साथ जब आती होगी,
भींचते- मींचते अधखुली आँखों में
ज़िन्दगी कभी तो, मुस्कुराती होगी ?

खिली धूप में भागते दौड़ते
परछाईं छाँव जब ढूंढती होगी,
यादें होंगी जब आँखों में तैरती
हवा कहीं तो, चुभती होगी ?

ढूंढती फिरती होगी तन्हाई
शाम जब भी ढलती होगी,
पास कितना भी हो सारा जहां
कमी कहीं तो, खलती होगी ?

न जाने कब वो मेरे पास आके बैठ गए
बैठे तो बैठे पर त्यौरी चढ़ा के बैठ गए
बाद कई दिनों थोड़ी जो हुई बातें
रुला के उट्ठे वो मुझे
फिर खुद मुस्कुरा के बैठ गए