आओ एक बार फिर
दिवाली मनाते हैं
अंदर के अँधेरे को
बाहर की रौशनी से
थोड़ा मिटाते हैं...
20 में 100 और
9 में 12 का आंकड़ा बैठाकर
चौखट पे 2
और खिड़की पे एक जलाकर
दीयों और मोमबत्तियों से
दुनिया जगमगाते हैं;
आओ एक बार फिर
दिवाली मनाते हैं
अंदर के अँधेरे को
बाहर की रौशनी से
थोड़ा मिटाते हैं...
टिकिया वाला सांप और
दर्जन भर चुटपुटी
बम बीड़ी, चटाई, एटम
घिरनी, राकेट, फुलझड़ी,
जो भी बटोरा है
सिक्कों में जोड़कर
उसे देकर अकेलेपन को
शोर में छिपाते हैं;
आओ एक बार फिर
दिवाली मनाते हैं
अंदर के अँधेरे को
बाहर की रौशनी से
थोड़ा मिटाते हैं...
गाय, घर, गाड़ी
चीनी के लाकर
मिट्टी की कटोरी में
बूंदी लड्डू सजाकर
दिल के किसी कोने में
एक घरौंदा सजाते हैं
आओ एक बार फिर
दिवाली मनाते हैं
अंदर के अँधेरे को
बाहर की रौशनी से
थोड़ा मिटाते हैं...
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