Wednesday, May 7, 2014

ऐसा लगा था...

हवाओं नें दी थी
चुपके से
जब भी दस्तक,
बार बार गया था
दरवाज़े पे
हर आहट पर
ऐसा लगा था
कि तुम आ गए;

न पाकर तुम्हें
वहां पे माना
गहराती थी मायूसी
फिर भी दिल को
आस लगी हो जैसे
पत्तियां भी सरसराई तो
ऐसा लगा था
कि तुम आ गए;

टिमटिमाती
पीछे से आती
रौशनी में
देख अपनी परछाई भी
ठहरता था मैं
निहारता था मैं
हरबार ऐसा लगा था
कि तुम आ गए;

जानती थी
है नामुमकिन सा
फिर भी न जाने क्यूँ
बाहर आने को बेताब सी
तैरती देर से आँखों में
रुक गयी ठिठक कर कहीं
जब ऐसा लगा था
कि तुम आ गए |

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