न जाने आज-कल मुझसे
कहाँ रूठ कर चली गई है
तू तो मेरी
प्यारी सहेली हुआ करती थी,
जब भी मैं
थका, हारा, टूटा होता
अपने आगोश में
मुझे भर लिया करती थी...
तू न होती है तो
रात भर जागता रहता हूँ मैं,
कभी भटकता, कभी ढूंढता
करवटें बदलता रहता हूँ मैं,
अब आएगी कब आएगी
तेरी राह ताकता रहता हूँ मैं...
मुझको है तेरी ज़रूरत
और तुझसे मैं क्या कहूँ
रह सकता हूँ यूँ तो अकेला
पर तेरे बिन मैं कैसे रहूँ?
बस इतनी सी गुज़ारिश है तुझसे
कम से कम तू कहीं न जा,
कर दे रोशन मेरी रातें
आ फिर से, मेरी आँखों में बस जा...
ले ले फिर अपने आगोश में
कर मुझे तनिक दुनिया से जुदा
ऐ निंदिया मेरी, ऐ निंदिया मेरी
आ फिर से, मेरी आँखों में बस जा...
कहाँ रूठ कर चली गई है
तू तो मेरी
प्यारी सहेली हुआ करती थी,
जब भी मैं
थका, हारा, टूटा होता
अपने आगोश में
मुझे भर लिया करती थी...
तू न होती है तो
रात भर जागता रहता हूँ मैं,
कभी भटकता, कभी ढूंढता
करवटें बदलता रहता हूँ मैं,
अब आएगी कब आएगी
तेरी राह ताकता रहता हूँ मैं...
मुझको है तेरी ज़रूरत
और तुझसे मैं क्या कहूँ
रह सकता हूँ यूँ तो अकेला
पर तेरे बिन मैं कैसे रहूँ?
बस इतनी सी गुज़ारिश है तुझसे
कम से कम तू कहीं न जा,
कर दे रोशन मेरी रातें
आ फिर से, मेरी आँखों में बस जा...
ले ले फिर अपने आगोश में
कर मुझे तनिक दुनिया से जुदा
ऐ निंदिया मेरी, ऐ निंदिया मेरी
आ फिर से, मेरी आँखों में बस जा...
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