Saturday, November 23, 2013

गलतियों का पिटारा...

गलतियों का पिटारा
यही तो रहा
जीवन सारा…

करता हूँ
भरता हूँ,
फिर करता हूँ
फिर भरता हूँ,
जो मिलना है
मिल जाता है,
जो जाना है
खो जाता है
और बीतता जाता है
समयचक्र सारा,
गलतियों का पिटारा
यही तो रहा
जीवन सारा…

रोकता हूँ खुद को
पर रुकता नहीं,
पूछता हूँ खुद से
पर टोकता नहीं,
हारता हूँ
उम्मीद छोड़ता नहीं,
टूटता हूँ
दम तोड़ता नहीं
और भरता जाता है
ज़ख्म सारा,
गलतियों का पिटारा
यही तो रहा
जीवन सारा…

कभी तो भरेगा
कभी तो टूटेगा
वो घड़ा
गलतियों का पिटारा
है जो गर्दिश में
चमकेगा वो सितारा,
तब शायद चले
किस्मत पे ज़ोर हमारा,
गलतियों का पिटारा
यही तो रहा
जीवन सारा…

मन कर रहा है...

सबकुछ पाने की जद्दोजहद से दूर
खुद को खोने का मन कर रहा है,
भागती-निकलती ज़िन्दगी में
थोड़ा ठहरने का मन कर रहा है,
लोगों की भीड़ हैं हर तरफ, फिर भी 
चंद अपनों से मिलने का मन कर रहा है,
फटे पन्नों सी इधर-उधर बिखरी ज़िन्दगी को
थोड़ा समेटने का मन कर रहा है,
बहुत दिनों से नहीं सो पाया चैन की नींद 
ग़र माँ कहीं मिल जाए तो
उसकी गोद में सोने का मन कर रहा है…

Wednesday, March 20, 2013

याद है मुझे - 3

याद है मुझे,
मैं जब भी उदास होता
तुम अक्सर कहती थी
मन छोटा मत करो पिंकू,
मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ;
पर ये कभी नहीं कहा था तुमने
कि जब वक़्त आयेगा
और मुझे ग़म बांटने की
ज़रुरत महसूस होगी
तुम मुझे अकेला छोड़ जाओगी !

याद है मुझे - 2

याद है मुझे,
तुम अक्सर कहती थी
टाइम पे खाया करो पिंकू,
वर्ना क्या करोगे
जब अकेले होगे और बीमार पड़ जाओगे,
पर ये कभी नहीं कहा था तुमने
कि जब ज़रुरत पड़ेगी तुम्हारी
और
वक़्त आयेगा
तुम मुझे अकेला छोड़ जाओगी !


...क्रमशः

याद है मुझे...

याद है मुझे,
तुम रोज़ कहती थी
कुछ बनाना सीख लो पिंकू,
वर्ना
क्या करोगे जब अकेले पड़ जाओगे,
पर ये कभी नहीं कहा था तुमने
कि जब बनाना आयेगा
और
फिर वक़्त आयेगा
तुम मुझे अकेला छोड़ जाओगी !


...क्रमशः

मैं, मुझे लगा में जीना नहीं चाहता हूँ

मैं, मुझे लगा में जीना नहीं चाहता हूँ
इसीलिए हर बात जान लेना चाहता हूँ...

न बोलते हो, न बोलना चाहते हो
पता नहीं किस बात पे इतना दूर भागते हो,
कहते हैं आँखों की भी अपनी एक भाषा होती है
उसी भाषा को तुम्हारी बोलती आँखों में पढ़
मैं कुछ समझना चाहता हूँ;
मैं, मुझे लगा में जीना नहीं चाहता हूँ
इसीलिए हर बात जान लेना चाहता हूँ...

बंधे हैं मेरे हाथ, सिले हैं मेरे जुबां
शायद कर न पाऊँ तुमसे मैं कुछ भी बयां,
फिर भी दुनिया से दूर, सबसे अलग ले जाके तुम्हें
जो तुमने दिया था कभी, वो हक़ जताकर
क्या है तुम्हारे मन में ये जानना चाहता हूँ;
मैं, मुझे लगा में जीना नहीं चाहता हूँ
इसीलिए हर बात जान लेना चाहता हूँ...

लोग क्या-क्या ख्याल बनाने लगे हैं...

आजकल लोग मेरे बारे में न जाने क्या-क्या ख्याल बनाने लगे हैं
मेरे होने न होने के फर्क पे ही सवाल उठाने लगे हैं...

किसी के लिए हूँ काम का, कुछ के लिए नाकाम
किसी का अब भी दोस्त हूँ, कुछ हो गए हैं परेशान
जब तक पूछता था मैं, वो हाल बता दिया करते थे,
थोड़ा चूक क्या गए कि अब वो अन्जान से होने लगे हैं
आजकल लोग मेरे बारे में न जाने क्या-क्या ख्याल बनाने लगे हैं
मेरे होने न होने के फर्क पे ही सवाल उठाने लगे हैं...

आ फिर से...

न जाने आज-कल मुझसे
कहाँ रूठ कर चली गई है
तू तो मेरी
प्यारी सहेली हुआ करती थी,
जब भी मैं
थका, हारा, टूटा होता
अपने आगोश में
मुझे भर लिया करती थी...

तू न होती है तो
रात भर जागता रहता हूँ मैं,
कभी भटकता, कभी ढूंढता
करवटें बदलता रहता हूँ मैं,
अब आएगी कब आएगी
तेरी राह ताकता रहता हूँ मैं...

मुझको है तेरी ज़रूरत
और तुझसे मैं क्या कहूँ
रह सकता हूँ यूँ तो अकेला
पर तेरे बिन मैं कैसे रहूँ?
बस इतनी सी गुज़ारिश है तुझसे
कम से कम तू कहीं न जा,
कर दे रोशन मेरी रातें
आ फिर से, मेरी आँखों में बस जा...

ले ले फिर अपने आगोश में
कर मुझे तनिक दुनिया से जुदा
ऐ निंदिया मेरी, ऐ निंदिया मेरी
आ फिर से, मेरी आँखों में बस जा...