Thursday, August 25, 2016

बाल मजबूर...

चल देता हूँ मैं मुट्ठी बांध कर 
क़िस्मत की लकीर मुझे मिलती नहीं,
अाँख मेरी हर सुबह खुलती है 
पर रोशनी मुझको दिखती नहीं... 

इक ख़्वाब मुझमें भी पलता है 
जो अाग में बेबसी की जलता है,
पानी के जब भी छींटें पड़े तो
मेरी अांखों से वो बह पड़ता है... 

सपना देखूँ या राह तकूँ मैं 
अब अायेगा, कब अाएगा,
मजबूरी की ज़ंजीर को तोड़ 
मुझको अाज़ाद करवाएगा... 

मुझे नई सुबह दिखलाएगा
मुझे नई सुबह दिखलाएगा... 

Monday, June 20, 2016

उसकी यादें

मेरी रखी मिठाई में से चुपके-चुपके अाधी खा जाता
फिर मुझे गुस्सा देख, मॉर्टन टॉफ़ी और लेमनचूस देकर मनाता 

लूडो खेलते वक़्त 'एक अाएगा' कह-कहकर मुझे चिढ़ाता
बाल नोंचने-खींचने पर भी हँसते-हँसते मुझे सह जाता 

हमेशा चुपके से, घर से झूठ बोलकर सिनेमा देखने भाग जाता 
और मेरे ब्लैकमेल करने पर अलग-अलग कॉमिक्स लाकर देता

मुझे डराकर मेरे जूते पे अपना हक़ जताता 
पर मुझे कोई और परेशान करे तो उससे बिना सोचे-समझे भिड़ जाता 

छोटे हो तुम, ऐसा बोलकर साइकिल ले जाता 
घर से स्कूल, स्कूल से घर, 
कभी गांधी मैदान तो कभी हथवा मार्किट के बहाने 
रोज़ साइकिल पे खूब घुमाता 

जब कमाने लगा तो मुझे पॉकेट मनी देता 
फिर मुझसे ही कभी 10, कभी 20 क़र्ज़ मांग लेता 

सिनेमा, साइकिल, कॉमिक्स, टॉफ़ी, लेमनचूस
सबकुछ अाज भी मिल जाता है 
बस नहीं मिलता तो वो कहीं नज़र नहीं अाता 

अाज भी रोटी का पहला और मिठाई का अाधा टुकड़ा 
उसके नाम से खाता हूँ 
जब भी भाई की शक्ल सामने अाती है 
उसकी यादें,
दिल के एक कमरे में बंद छोड़ अाता हूँ.